ई-पीक पाहणी

ई-पीक पाहणी: आधुनिक शेती का नया अध्याय
आज के डिजिटल युग में, जब हर क्षेत्र में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ रहा है, तो कृषि क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है. महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के लिए ई-पीक पाहणी नामक एक डिजिटल पहल शुरू की है, जिसने पारंपरिक फसल सर्वेक्षण के तरीकों को पूरी तरह से बदल दिया है. यह सिर्फ एक ऐप नहीं, बल्कि किसानों को सशक्त बनाने, पारदर्शिता लाने और सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम है.
क्या है ई-पीक पाहणी?
ई-पीक पाहणी एक मोबाइल एप्लिकेशन है, जिसे महाराष्ट्र सरकार के राजस्व और कृषि विभाग ने मिलकर बनाया है. इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को अपनी फसल की जानकारी, जैसे कि बोई गई फसल का प्रकार, उसका क्षेत्र और अन्य महत्वपूर्ण विवरण, सीधे सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने की सुविधा देना है. पहले यह काम सरकारी अधिकारी, जैसे कि तलाठी (पटवारी), करते थे, जिसमें काफी समय लगता था और कई बार गलतियाँ भी हो जाती थीं. अब, किसान खुद अपने स्मार्टफोन से यह जानकारी ऐप पर अपलोड कर सकते हैं.
यह कैसे काम करता है?
इस ऐप का उपयोग करना बहुत आसान है. किसान को सबसे पहले अपने खेत के पास जाकर ऐप में अपनी फसल की फोटो खींचनी होती है. यह फोटो जियो-टैग (geo-tag) होती है, जिसका मतलब है कि ऐप अपने आप उस फोटो की लोकेशन रिकॉर्ड कर लेता है. इससे यह सुनिश्चित होता है कि फसल की जानकारी सही जगह से ली गई है. किसान को अपनी फसल का प्रकार (जैसे, ज्वार, बाजरा, कपास, आदि) और बोए गए क्षेत्र का विवरण भी दर्ज करना होता है. यह सारी जानकारी सीधे सरकारी सर्वर पर अपलोड हो जाती है.
ई-पीक पाहणी के फायदे

  • पारदर्शिता और सटीकता: यह सबसे बड़ा फायदा है. जब किसान खुद अपनी फसल की जानकारी दर्ज करता है, तो गलतियों की गुंजाइश बहुत कम हो जाती है. इससे सरकारी रिकॉर्ड में सटीकता आती है, जिससे भविष्य में योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंच पाता है.
  • सरकारी योजनाओं का लाभ: सरकार विभिन्न योजनाओं, जैसे कि फसल बीमा, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और आपदा राहत के लिए किसानों की फसल के डेटा का उपयोग करती है. ई-पीक पाहणी से प्राप्त सटीक जानकारी के आधार पर, यह सुनिश्चित होता है कि योग्य किसानों को ही इन योजनाओं का लाभ मिले.
  • समय और श्रम की बचत: इस ऐप के आने से सरकारी अधिकारियों और किसानों दोनों का समय बचता है. किसानों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते और अधिकारी भी अन्य महत्वपूर्ण कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं.
  • ऋण और बीमा सुविधा: बैंक और वित्तीय संस्थान अक्सर कृषि ऋण या फसल बीमा देते समय फसल के विवरण की मांग करते हैं. ई-पीक पाहणी से प्राप्त डेटा का उपयोग करके किसान आसानी से यह जानकारी प्रदान कर सकते हैं, जिससे ऋण या बीमा प्राप्त करने की प्रक्रिया तेज हो जाती है.
  • आपदा प्रबंधन में सहायक: यदि किसी क्षेत्र में बाढ़, सूखा या अन्य प्राकृतिक आपदा आती है, तो सरकार इस ऐप के डेटा का उपयोग करके यह जान सकती है कि कौन-सी फसलें प्रभावित हुई हैं. इससे नुकसान का अनुमान लगाना और प्रभावित किसानों को समय पर मदद पहुंचाना आसान हो जाता है.
    चुनौतियाँ और समाधान
    ई-पीक पाहणी एक क्रांतिकारी कदम है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं. कई ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या है और कुछ किसानों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं. इसके अलावा, कुछ बुजुर्ग किसानों के लिए ऐप का उपयोग करना मुश्किल हो सकता है.
    इन चुनौतियों से निपटने के लिए, सरकार ने कई कदम उठाए हैं. ग्राम पंचायत स्तर पर ई-सुविधा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां किसान ऐप का उपयोग करने के लिए मदद ले सकते हैं. साथ ही, सरकार किसानों को शिक्षित करने और उन्हें ऐप के उपयोग के बारे में जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियान चला रही है.
    निष्कर्ष
    ई-पीक पाहणी सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि एक सामाजिक और आर्थिक क्रांति है. यह किसानों को डिजिटल दुनिया से जोड़ता है और उन्हें अपनी कृषि संबंधी जानकारी का मालिक बनाता है. यह आधुनिक भारत में कृषि को एक नई दिशा दे रहा है, जहां तकनीक और किसान मिलकर प्रगति की नई गाथा लिख रहे हैं.
By rajeshwarshirsath@gmail.com

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